विकास संप्रेषण प्रभाग
लोक सेवा प्रसारण के लिए निधि व्यवस्था का एक मॉडल
विकासोन्मुखी मामलों को प्रकाश में लाने की सामाजिक जिम्मेदारी को निभाने और सरकारी विभागों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संप्रेषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दूरदर्शन ने 2001 में विकास संप्रेषण प्रभाग की स्थापना की ।
यह संकल्पना मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों सहित सरकारी भागीदारों से निधि प्राप्त करके राजस्व जुटाने की आवश्यकता के फलस्वरूप उत्पन्न हुई । राजस्व जुटाने की इस अद्वितीय योजना में प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर प्रसारण समय (एयर टाइम) बेचकर आय प्राप्त करने की परिकल्पना की गई है ।
विकास सम्प्रेषण प्रभाग एक ही खिड़की पर निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान करता है:-
Ø दूरदर्शन के प्रसारण समय और कार्यक्रम निर्माण क्षमता का विपणन,
Ø परामर्श देना और उपभोक्ता अनुकूल मीडिया की योजना बनाना,
Ø पूरे देश के केन्द्रों में क्षेत्रीय भाषाओं में कार्यक्रमों का निर्माण करना,
Ø ग्राहकों के लिए फीडबैक और अनुसंधान सर्वेक्षण करना ।
लगातार बढ़ रहे उपग्रह चैनल भी दूरदर्शन के चैनलों की बिक्री के लिए चुनौती प्रदान करते हैं । केबल ऑपरेटर जो निर्णय लेने वालों के घरों में कनेक्शन उपलब्ध कराते हैं, दूरदर्शन के चैनलों के पक्ष में नहीं होते हैं । दूरदर्शन की ओर से विकास संप्रेषण प्रभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए सकारात्मक दृष्टिकोण, ऐसा किया जा सकता है वाले रवैये और कुशल ग्राहक सेवा के फलस्वरूप सरकारी ग्राहकों में अच्छा परिवर्तन आया है । तथापि, अपेक्षित परिणाम हासिल करने के लिए विभिन्न उपाय किए गए:-
Ø विपणन एजेंटों के बजाय ग्राहक और दूरदर्शन (डीसीडी) के बीच सीधी कार्रवाई,
Ø एक विशेष रेट कार्ड, जिसकी समय-समय पर पुनरीक्षा करके उसे संशोधित किया जाता है,
Ø बोनस के रूप में अधिक प्रसारण समय देना जो विभिन्न भाषाई क्षेत्रों में उपलब्ध कराया जाता है,
Ø पारदर्शी तंत्र-प्रणाली और दरें
Ø बहुत कम समय के नोटिस पर दूर-दराज के इलाकों में अभियान आरम्भ करना
Ø बहुत कम समय के नोटिस पर पूरे देश में ग्राहकों से संबंधित घटनाओं की कवरेज करना और एक ही खिड़की पर विपणन इकाई की सुविधा तथा सृजनात्मक कार्यक्रम निर्माण केन्द्र ।
विकास संप्रेषण प्रभाग पूरे देश में फैले कार्यक्रम निर्माण स्टुडियो की सहायता से एक सृजनात्मक कार्यक्रम निर्माण केन्द्र के रूप में कार्य करता है । दूरदर्शन की अनेक भाषाओं में कार्यक्रमों के निर्माण की क्षमता विपणन का उत्तम साधन प्रदान करती है परन्तु इसकी छवि ग्राहकों को आकर्षित नहीं करती । पूरे देश में फैले केन्द्रों में स्थानीय भाषाओं और बोलियों में साथ-साथ कार्यक्रम निर्माण के लिए इंटरएक्टिव अनुसंधान आधारित एवं प्रभावोन्मुखी कार्यक्रम बनाने की नई पहलशक्ति से शुरुआत करने में सहायता मिली है । इसके लिए इंटरएक्टिव फार्मटों का बहुत ही सावधानीपूर्वक चयन किया जाता है । परंतु इस प्रकार के कार्यों की प्रबंध व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है। बहुत ही कम समय में ग्राहक की आवश्यकता के अनुसार कार्यक्रम का निर्माण करना दूरदर्शन के लिए एक नई घटना है । यह बहुत ही कठिन कार्य है क्योंकि इस के लिए संगठन के रवैये और परिपाटियों में भारी परिवर्तन किया जाना जरूरी है ।
वर्ष 2001 तक सरकारी विभागों से प्राप्त होने वाली लघु राशियों का उपयोग ग्राहकों की ओर से निजी निर्माताओं से कार्यक्रम बनवाने के लिए किया जाता था । विकास संप्रेषण प्रभाग ने उपलब्ध कार्मिकों और संसाधनों का उपयोग करके ऐसे सभी कार्यक्रमों का स्वयं ही निर्माण करना आरम्भ कर दिया ।
सभी कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण प्रसारणों के लिए ग्राहकों द्वारा पूरा भुगतान किया जाता है तथा लोक सेवा प्रसारक के रूप में दूरदर्शन बोनस प्रसारण समय प्रदान करके अपना योगदान देता है । इस बोनस की मात्रा 60% से लेकर 250% तक है जो इस बात पर निर्भर करती है कि कोई विभाग एक वित्तीय वर्ष में दूरदर्शन पर कितना धन खर्च कर रहा है । बोनस की इस मात्रा को केन्द्रीय और क्षेत्रीय चैनलों में बांट दिया जाता है, जिससे चैनलों की छवि में सुधार होता है जबकि ग्राहकों को अपने अभियानों के लिए बहुत अधिक दर्शक मिलते हैं जो विकास संबंधी मुद्दों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं ।
इस प्रकार, विकास संप्रेषण प्रभाग ऐसे ग्राहकों की संख्या में वृद्धि करने में सफल रहा है जिन्होंने दूरदर्शन की योग्यता एवं क्षमता में विश्वास बनाए रखा है । ग्राहकों को सूचना एवं आधारभूत जानकारी उपलब्ध कराते हुए सभी परियोजनाएं समय पर आरंभ और पूरी की जाती हैं जबकि इससे पूर्व ऐसा नहीं होता था । कार्यक्रमों की मात्रा में वृद्धि करते हुए विकास संप्रेषण प्रभाग ने कार्यक्रमों की गुणता भी बनाए रखी है जिसके फलस्वरूप सरकारी ग्राहकों से प्राप्त होने वाले राजस्व में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है । यह दूरदर्शन के कुल राजस्व का लगभग 24% बैठता है । विकास संप्रेषण प्रभाग ने पांच वर्ष के कार्यकाल के अन्दर राजस्व में 825% की वृद्धि दर्ज की है ।
कार्यक्रमों का इन-हाउस निर्माण पुन: आरंभ करना
चूंकि इन-हाऊस निर्माण विगत के गौरव से किसी भी प्रकार से जुड़ा हुआ नहीं था इसलिए सुविधाओं, प्रक्रियाओं और मानव संसाधन की दृष्टि से लंबे समय तक इसकी उपेक्षा की जाती रही । कौशल एवं गुणता के लिए इस प्रणाली को निधियां प्रदान करने वाली एजेंसी के प्रति उत्तरदायी बनाना कोई आसान कार्य नहीं है । इसके लिए संगठन के प्रत्येक स्तर और प्रत्येक क्षेत्र अर्थात् कार्यक्रम, इंजीनियरिंग, प्रशासन, वित्त और अनुसंधान को प्रोत्साहक, अनुकूल और संवेदनशील बनाने की आवश्कता है ।
किसी परियोजना को कार्यान्वित करने के लिए देश के अन्दर समर्पित टीमों का पता होना आवश्यक है । चूंकि पिछले 15 वर्ष से प्रसार भारती ने कार्मिकों की भर्ती करना बंद कर रखा है इसलिए कार्यक्रमों के निर्माण के लिए अपेक्षित कार्मिकों की कमी है । परंतु राष्ट्रीय कार्यशालाओं में चुनिंदा टीमों को नीति निर्माताओं के साथ सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों की पूरी जानकारी प्रदान की जाती है और विषय के विशेषज्ञों के साथ तकनीकी जानकारी दी जाती है । इन राष्ट्रीय कार्यशालाओं में राष्ट्रीय, राज्य, जिला और ग्राम स्तरों पर सेवा प्रदान करने वालों के साथ नेटवर्किंग भी आरम्भ की जाती है । तदुपरान्त रचनात्मक कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें प्रचार संबंधी योजना भी तैयार की जाती है । विकास संप्रेषण प्रभाग द्वारा किए जाने वाले अन्य कार्य इस प्रकार हैं- नियमित गुणता लेखापरीक्षा, परियोजना का बजट बनाना और निधियों का वितरण करना, प्रभाव के मूल्यांकन संबंधी अध्ययन करना तथा ग्राहक को सेवा प्रदान करना । मुख्यालय और फील्ड में इंजीनियरी शाखा के जरिए तकनीक सुविधाओं का स्तर बढ़ाना, कार्यक्रम निर्माण करने की प्रक्रियाओं को सरल एवं कारगर बनाना तथा निर्माताओं के सर्जनात्मक कौशल में सुधार करना जारी है । पिछले पांच वर्षो के दौरान, विकास सम्प्रेषण प्रभाग ने नीति निर्माताओं, केन्द्र एवं राज्य के अधिकारियों के साथ 50 से भी अधिक अनुकूलन/प्रशिक्षण कार्यशालाओं, केन्द्रों के कार्यक्रम एवं इंजीनियरी प्रमुखों को शामिल करके प्रक्रियाओं और प्रणालियों के लिए इन-हाउस कार्यशालाओं तथा कार्यक्रम निर्माताओं और तकनीकी निदेशकों के साथ-साथ अनुसंधानकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया है ।
ग्राहक के साथ सहयोग करने, नेटवर्क बनाने, सेवा प्रदान करने के संबंध में मीडिया की विश्वसनीयता को बनाए रखने के क्षेत्र में अभियान के दौरान जहां कहीं कमी का पता लगा प्रत्येक स्तर और प्रत्येक कदम पर चुनौतियां सामने आईं । स्थानातंरणीय सेवा में केन्द्रों पर टीमों को परिपूर्ण रूप में बनाए रखने, विभिन्न विधाओं के बीच समन्वय बनाने, रूढिवादी परम्पराओं और सहायक सेवाओं द्वारा मीडिया के प्रचालन कार्यो को पर्याप्त रूप से न समझने जैसे विषयों से संबंधित संगठन की आन्तरिक समस्याओं का लगातार सामना करना पड़ता है ।
यद्यपि क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विषय-वस्तु तैयार की जाती है, तथापि स्थानीय तौर पर दूरदराज के क्षेत्रों में निर्मित ऐसी क्षेत्र विशिष्ट प्रस्तुतियों में साहचर्य एवं प्रामाणिकता बनाए रखना एक और चुनौती होती है ।
कार्यक्रमों के निर्माण की वित्त व्यवस्था इस मार्ग से करने के फलस्वरूप प्रसार भारती में कार्यक्रम निर्माण के लिए पर्याप्त निधियां उपलब्ध न होने की एक प्रमुख बाधा दूर हो गई है क्योंकि कार्यक्रम निर्माण अब राजस्व जुटाने का कार्यकलाप बन गया है । कार्यक्रम निर्माण के लिए अपेक्षित विशिष्ट सेट और टाइटल ट्रैक (बॉलीवुड के कलाकारों द्वारा रचित), एनिमेटेड ग्राफिक्स जैसे कतिपय मुद्दों तथा विशिष्ट संदेशों और प्रस्तुतियों के लिए फिल्मी हस्तियों सहित स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों को सहयोजित करने पर खर्च करने के लिए निधियां उपलब्ध कराई गई हैं । अधिक फील्ड आधारित विषय-वस्तु, बेहतर प्रस्तुति और कुछ अभिनव परिवर्तनों के फलस्वरूप ग्राहकों को एक के बाद अगले वर्ष के लिए अपने पास रखने में सहायता मिली है । वर्ष 2001 तक ये ग्राहक दूरदर्शन पर और अन्यत्र प्रसारित किए जाने वाले उक्त कार्यक्रमों के लिए निजी निर्माताओं को कमीशन करते थे ।
न केवल हाथ में ली गई और पूरी की गई परियोजनाओं की संख्या की दृष्टि से अथवा निर्मित कार्यक्रमों की गुणत्ता के साथ-साथ मात्रा की दृष्टि से उत्साहवर्धक परिणाम प्राप्त हुए हैं बल्कि लक्षित दर्शकों को प्रभावित करने के सामाजिक संप्रेषण के लक्ष्य से अधिक उपलब्धि की दृष्टि से भी उत्साहवर्धक परिणाम प्राप्त हुए हैं ।
ग्रामीण विकास अभियान
विकास संप्रेषण प्रभाग ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए एक द्वि माध्यम, रेडियो और टेलीविजन अभियान के साथ आशाजनक शुरुआत की है । ग्रामीण विकास अभियान बड़े पैमाने पर चलाया गया था। ग्रामीण दर्शकों के लिए प्रसारण एवं पहुंच की दृष्टि से नेटवर्क की शक्ति को बढ़ाते हुए इसकी संकल्पना प्रसार भारती के समस्त संसाधनों (कार्यक्रम, इंजीनियरी और अनुसंधान) का अधिकतम उपयोग करने के उद्देश्य से की गई थी । लोक सेवा प्रसारक की भूमिका को पुन: स्थापित करने और सृजनात्मक स्व-निर्माण क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए प्रभाग ने इस महान चुनौती को स्वीकार किया ।
राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और राज्य स्तर पर क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की गईं । ग्रामीण विकास मंत्रालय और संबंधित राज्य सरकारों के अधिकारियों के साथ-साथ लगभग 2500 व्यक्तियों को इलैक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया गया । इन कार्यशालाओं के उपरांत एक दूसरे के कार्मिकों को प्राप्त अनुभवों एवं लाभों को बांटने के लिए आकाशवाणी और दूरदर्शन केन्द्रों के निदेशकों की समन्वय बैठकें आयोजित की गईं । इन बैठकों के दौरान जिन प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया वे इस प्रकार थे- रिकार्ड की जाने योग्य सफलता की घटनाएं, साप्ताहिक पूर्व-परीक्षण अनुसूची, द्वि माध्यम प्रचार योजनाएं ।
ग्रामीण विकास अभियान का मुख्य उद्देश्य लक्षित दर्शकों में जागरूकता उत्पन्न करना था । इसमें मकान, सड़क, पेय जल और सफाई जैसे क्षेत्रों में मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने पर बल दिया गया था । 29 भाषाओं और बोलियों में कार्यक्रमों के माध्यम से 6,00,000 गांवों को कवर करने वाली मंत्रालय की लगभग एक दर्जन योजनाओं के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए कार्यक्रमों का निर्माण करने और प्रसारित करने में आकाशवाणी के लगभग 150 केंद्रों और दूरदर्शन के 32 केंद्रों को शामिल किया गया ।
इन परिणामों के फलस्वरूप 1008 कार्यक्रम बनाए गए । दूरदर्शन ने लोक सेवा के विज्ञापन बनाने के प्रयोग भी किए । विभिन्न भाषाई और सांस्कृतिक क्षेत्रों की सफलता की घटनाओं के परस्पर आदान-प्रदान से इस अभियान की सफलता में बड़ी सहायता मिली है । इससे दर्शकों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की पद्धतियों का अनुसरण करने के लिए भी प्रोत्साहन मिला है ।
दर्शक अनुसंधान सर्वेक्षण से पता चला है कि अभियान के बाद मंत्रालय की ग्रामीण विकास योजनाओं के बारे में 69.4% लक्षित दर्शकों में जागरूकता उत्पन्न हुई है ।
उपयोग किए गए विभिन्न स्वरूपों में दूरदर्शन केन्द्र, जयपुर द्वारा निर्मित एक टैली-ड्रामा को वर्ष 2002 के सर्वोत्तम दूरदर्शन धारावाहिक का पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
तब से दूरदर्शन के 22 केंद्रों से ग्रामीण विकास के बारे में 15 मिनट का एक कार्यक्रम प्रसारित किया जा रहा है ।
एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता
दूरदर्शन-बीबीसी-एनएसीओ की भागीदारी
विकास संप्रेषण प्रभाग ने वर्ष 2001 में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट (बीबीसी डब्ल्यूएसटी) और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) के साथ एक भागीदारी पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य मीडिया का प्रभावी ढंग से उपयोग करके सामाजिक विकास को बढ़ावा देना था । आरंभ में दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में एचआईवी/एड्स के संबंध में एक अभियान शुरू किया गया था । अभियान का पहला कार्यक्रम जून, 2002 में प्रसारित किया गया था तथा इसमें लोक सेवा विज्ञापन (स्पॉट्स), जासूसी धारावाहिक जासूस विजय और एक युवा टेलीविजन शो हाथ से हाथ मिला का निर्माण एवं प्रसारण शामिल था । विकास संप्रेषण प्रभाग ने जासूस विजय को प्राइम टाइम स्लॉट पर राष्ट्रीय चैनल पर दिखाने के लिए पहल की । ऐसा करने से जासूस विजय को वाणिज्यिक दृष्टि से सफलता मिली । इस प्रभाग ने जासूस विजय का क्षेत्रीय भाषाओं में रूपान्तरण प्रस्तुत किया ताकि यह देश के कोने-कोने तक पहुँच सके। फिलहाल इसके तीसरे चरण में इस कार्यक्रम को सात भाषाओं में डब किया जाता है ।
ग्लोबल मीडिया एड्स इनिशिएटिव
विकास संप्रेषण प्रभाग को संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान द्वारा जनवरी, 2004 में आरंभ किए गए ग्लोबल मीडिया एड्स इनिशिएटिव (जीएमएआई) का भागीदार होने का विशिष्ट गौरव प्राप्त है । इस प्रभाग ने भारत के प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित एचआईवी/एड्स संबंधी राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया । अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त सिनेस्टार रिचर्ड गेरे ने विशेष अतिथि के रूप में शिखर सम्मेलन में भाग लिया । प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपनी प्रस्तुति में कल्याणी और जासूस विजय की उपलब्धियों का उल्लेख किया । दूरदर्शन की पहल की प्रशंसा करते हुए केंद्रीय सूचना, प्रसारण और संस्कृति मंत्री ने कहा कि अन्य मीडिया को एचआईवी/एड्स संवाद में दूरदर्शन का अनुकरण करना चाहिए ।
जीएमएआई के साथ सहयोग करते हुए विकास संप्रेषण प्रभाग ने हीरोज प्रोजेक्ट में भागीदारी की । एचआईवी/एड्स से पीड़ित व्यक्ति रिकी पर एक लघु वृत्तचित्र का शिलांग, गुवाहाटी में निर्माण किया गया तथा असम से कल्याणी कार्यक्रम में इसका प्रसारण किया गया । इस वृत्तचित्र को अन्य भाषाओं में भी डब किया गया ।
विकास संप्रेषण प्रभाग की यूनीसेफ, कैंसर फैमिली फाउंडेशन, एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ ब्रॉडकास्ट डेवलपमेंट, फोर्ड फाउंडेशन तथा यूरोपीय संघ के साथ भागीदारी रही है । ये भागीदारियां एचआईवी/एड्स के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए क्षमता निर्माण कर रही हैं और संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों का आदान-प्रदान कर रही हैं ।
कल्याणी
विकास संप्रेषण प्रभाग ने मई, 2002 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से कल्याणी कार्यक्रम शुरू किया था । आरंभ में यह कार्यक्रम मलेरिया, एचआईवी/एड्स, कैंसर, क्षयरोग, आयोडीन की कमी, तंबाकू संबंधी और पानी से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में विश्व तंबाकू निषेध दिवस (वर्ल्ड नो टोबेको डे) की पूर्वसंध्या पर एक साप्ताहिक कार्यक्रम के रूप में एक वर्ष के लिए शुरू किया गया था । बाद के वर्षों में इसमें कुष्ठरोग, अंधापन नियंत्रण और आहार सुरक्षा जैसे अन्य विषय जोड़ दिए गए ।
उत्कृष्ट परस्पर प्रभावी, अभिनव फार्मेटों, प्रस्तुतिकरण की बेजोड़ शैली, समेकित दृष्टिकोण और कल्याणी हैल्थ क्लब स्थापित करने की उत्कृष्ट पहल की वजह से इस कार्यक्रम की प्रभावकारी शक्ति बहुत ही जल्दी साबित हो गई । इससे अक्तूबर, 2002 में रिप्रोडक्टिव चाइल्ड हैल्थ के संबंध में एक और साप्ताहिक कार्यक्रम कल्याणी-।। के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ । कल्याणी-।। के फलस्वरूप कल्याणी कार्यक्रम प्राप्त करने वाले अन्य आठ राज्यों में पहाड़ी राज्य उत्तरांचल भी जुड़ गया । इस समय कल्याणी कार्यक्रम तीन भाषाओं और छह बोलियों में दूरदर्शन के 21 केन्द्रों से सप्ताह में चार बार प्रसारित किया जाता है और दो बार पुन: प्रसारित किया जाता है ।
सर्वाधिक पिछड़े और सघन आबादी वाले नौ राज्यों के लक्षित दर्शकों पर इसके प्रभाव से स्पष्ट होता है कि कल्याणी की प्रतिक्रिया अत्यधिक उत्साहवर्धक रही है। इस समय कल्याणी कार्यक्रम अपने पांचवें वर्ष में सफलतापूर्वक चल रहा है ।
एमटीवी के साथ सहयोग
विकास संप्रेषण प्रभाग ने वर्ल्ड एड्स डे समिट के लिए संगीत चैनल एमटीवी के साथ भी सहयोग किया है । यह एक विस्मयकारी सहयोग था क्योंकि इसने विशेषताओं की दृष्टि से एकदम भिन्न दो चैनलों को आपस में मिलने के लिए आधार प्रदान किया है । इनमें से एक चैनल अपने गाम्भीर्य एवं सादगी के लिए प्रसिद्ध है तो दूसरा सीधी-सादी मौजमस्ती एवं मनोरंजन का चैनल है । सहयोग के दौरान सॉफ्टवेयर और लोकेशनों की रिपैकेजिंग और रूपान्तर भी हुआ ।
स्वास्थ्य के संबंध में ज्ञान को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए प्रभाग पल्स पोलियो और रक्त दान संबंधी अभियानों के लिए कार्यक्रमों का निर्माण कर रहा है । इसके अलावा विश्व एड्स दिवस पर 21 राज्यों में इंटरएक्टिव कार्यक्रम भी प्रसारित किए गए ।
विशाल दर्शकता, व्यापक पहुँच और बहुभाषी आधार की वजह से दूरदर्शन एक शक्तिशाली मीडिया प्लेटफार्म है । इसने अनेक मंत्रालयों और विभागों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है ।
कैसकेडिंग क्वालिटी गवर्नेंस
भारत में ई-गवर्नेंस की उत्कृष्ट पद्धतियों के बारे में वृतचित्रों की एक श्रृंखला का निर्माण करने और उसका प्रसारण करने के लिए वर्ष 2001 में एक अन्य उल्लेखनीय भागीदारी प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के साथ हुई थी । इसका शीर्षक कैसकेडिंग क्वालिटी गवर्नेंस था । इस अभियान का प्रसारण 2003 में किया गया तथा इसमें 12 वृत्तचित्र शामिल थे । इन वृत्तचित्रों का डीडी नेशनल पर और दूरदर्शन केन्द्रों के जरिए 12 राज्यों में इतनी ही भाषाओं में प्रसारण किया गया था। जिन केन्द्रों ने इन वृत्तचित्रों का प्रसारण किया वे हैं बंगलौर, गुवाहाटी, मुंबई, कोलकाता, भुवनेश्वर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, जालंधर, अहमदाबाद, चेन्नै और हैदराबाद ।
बीमा संबंधी मामले
बीमा नियामक विकास प्राधिकरण की ओर से विकास सम्प्रेषण प्रभाग ने लोगों में बीमा के लाभों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए एक अभियान शुरू किया था । इस अभियान का 10 राज्यों में 10 केन्द्रों द्वारा इतनी ही भाषाओं एवं बोलियों में