विकास संप्रेषण प्रभाग

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नैरोकास्टिंग

नैरोकास्टिंग

       प्रसारण के क्षेत्र में "नैरोकास्टिंग" आज एक नया शब्द है । इसके अंतर्गत स्थान विशिष्ट कार्यक्रमों से अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्र को कवर किया जाता है, जिससे मीडिया और दर्शकों के बीच घनिष्ठता और बढ़ जाती है । दूरदर्शन ने कवरेज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जीवन शैली से संबंधित विशिष्ट स्थानीय मुद्दों को प्रस्तुत करने के लिए नैरोकास्टिंग की संकल्पना आरंभ करने की पहल की है । चूंकि भारत मुख्य रूप से कृषि प्रधान देश है इसलिए ग्रामीण प्रसारण में कृषि और उससे संबंधित अन्य क्षेत्र स्वत: ही प्रधान हो जाते हैं । दूरदर्शन के नैरोकास्टिंग कार्यक्रमों में इन मुद्दों को प्रस्तुत किया जाता है ।

 

      दूरदर्शन द्वारा वर्ष 2000 में शुरू की गई नैरोकास्टिंग में आरंभ में 12 अल्प शक्ति ट्रांसमीटर शामिल थे और सप्ताह में एक/दो बार स्थानीय शैली के कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता था । इन कार्यक्रमों की विषयवस्तु कुछ रचनात्मक अनुसंधान पर आधारित होती थी ताकि कवरेज क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रसारण को सार्थक एवं गरिमापूर्ण बनाया जा सके । दूरदर्शन के दर्शक अनुसंधान एकक द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि कवरेज क्षेत्र के लोगों ने नैरोकास्टिंग के कार्यक्रमों को बहुत ही अच्छी तरह से ग्रहण किया है तथा इससे उन्हें कार्यक्रमों के माध्यम से समझाई गई कृषि संबंधी कुछ नवीनतम तकनीकों को अपनाने में सहायता भी मिली है ।

 

      इसी संकल्पना के आधार पर जनवरी, 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा किसान चैनल का शुभारंभ किया गया था ।

 

      नैरोकास्ट कृषि कार्यक्रमों का प्रसारण सोमवार से शुक्रवार तक आधे घंटे के लिए 3 स्तरों अर्थात् राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय (माइक्रो) पर किया जा रहा है ।

 

      राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का निर्माण केन्द्रीय रूप से किया जाता है और डीडी-1 नेशनल पर उपग्रह के जरिए तथा स्थलीय ट्रांसमीटरों पर प्रात: 6.30 बजे दिल्ली से इनका प्रसारण किया जाता है ।

 

      क्षेत्रीय स्तर के कार्यक्रमों का निर्माण और प्रसारण 18 क्षेत्रीय केन्द्रों से सायं लगभग 6.30 बजे किया जाता है । केन्द्रों के कवरेज क्षेत्र के अंदर स्थलीय ट्रांसमीटर संबंधित क्षेत्रीय केन्द्रों से इन कार्यक्रमों को रिले करते हैं ।

 

      क्षेत्रीय कार्यक्रमों को अगले दिन प्रात: 6.30 बजे उपग्रह मोड में दुबारा प्रसारित किया जाता है ।

 

      स्थानीय स्तर के नैरोकास्ट कार्यक्रमों का निर्माण और प्रसारण स्थानीय तौर पर 36 नैरोकास्ट क्लस्टरों (180 ट्रांसमीटरों) से सायं लगभग 6.30 बजे किया जाता है ।

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