वाणिज्यिक विज्ञापन के लिए संहिता
दूरदर्शन पर वाणिज्यिक विज्ञापन के लिए संहिता
परिभाषाएं : इस संहिता में जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो:-
(i) "सरकार" से भारत सरकार अभिप्रेत है ।
(ii) "महानिदेशक" से महानिदेशक, दूरदर्शन या उसके द्वारा उसकी ओर से सम्यक रूप से प्राधिकृत कोई अधिकारी अभिप्रेत है और इसमें निदेशक, दूरदर्शन केन्द्र भी शामिल हैं ।
(iii) "विज्ञापनकर्ता" से ऐसा व्यक्ति या संगठन अभिप्रेत है जिसने दूरदर्शन पर प्रसारण के लिए किसी विज्ञापन का प्रस्ताव किया है। इसमें वाणिज्यिक प्रतिष्ठान भी शामिल है।
(iv) "विज्ञापन देने वाली एजेंसी" से कोई संगठन अभिप्रेत है जो इसके लिए दूरदर्शन के पास प्रत्यायित या पंजीकृत है ।
(v) "विज्ञापन" में दूरदर्शन द्वारा प्रसारित कार्यक्रम में बिक्री बढ़ाने की दृष्टि से समाविष्ट वस्तुओं या सेवाओं के प्रचार की कोई मद शामिल है ।
(vi) "स्पॉट विज्ञापन" से वह सीधा विज्ञापन अभिप्रेत है जिसमें उत्पादों/सेवाओं, उनके गुणों और अन्य संबंधित ब्यौरों का उल्लेख हो ।
(vii) "विज्ञापन एसोसिएशन" से कोई एसोसिएशन या सोसाइटी या कोई अन्य निकाय अभिप्रेत है जिसके संघटक सदस्य विज्ञापन देने वाली ऐसी एजेंसियां हैं जो दूरदर्शन के पास पंजीकृत या प्रत्यायित हैं।
कार्यक्षेत्र
(क) महानिदेशक, दूरदर्शन प्रसारण के लिए किसी विज्ञापन की उपयुक्तता अथवा अनुपयुक्तता के अनन्य निर्णायक होंगे और उनका निर्णय अंतिम होगा ।
(ख) दूरदर्शन का समय निर्धारित दरों के अनुसार महानिदेशक, दूरदर्शन के अनन्य विवेक पर विज्ञापनकर्ताओं/विज्ञापन देने वाली एजेंसियों को बेचा जाएगा ।
(ग) विज्ञापन को उपयुक्त वाइप्स/ब्लैंक का उपयोग करके कार्यक्रम से स्पष्ट रूप से अलग किया जाएगा ताकि कार्यक्रम के संदेश को विज्ञापन में दिए जा रहे संदेश और इमेज के साथ मिल जाने से बचाया जा सके ।
1.भूमिका
किसी विक्रेता के लिए अपने माल और सेवाओं के प्राति रुचि बढ़ाने हेतु विज्ञापन एक महत्वपूर्ण और न्यायसंगत साधन है । विज्ञापन की सफलता लोगों के विश्वास पर निर्भर है । अत: ऐसे किसी व्यवहार की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जो इस विश्वास को कम करती हो । यहां अधिकथित मानक स्वीकार्यता के न्यूनतम मानक के रूप में समझे जाने चाहिएं, जिन्हें समय-समय पर दर्शकों की भावनाओं के विद्यमान मानदंडों को ध्यान में रखते हुए पुनरीक्षित किया जाएगा ।
दूरदर्शन में विज्ञापन की स्वस्थ पद्धितयों को विकसित एवं प्रोत्साहित करने के लिए आचार के निम्नलिखित मानक निर्धारित किए जाते हैं । इन नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारी विज्ञापनकर्ता और विज्ञापन एजेंसी दोनों की समान रूप से है ।
उन सभी से, जो विज्ञापन कार्य में लगे हुए हैं, यह जोरदार सिफारिश की जाती है कि वे देश में विज्ञापनों पर प्रभाव डालने वाले विधान से और विशेष रूप से निम्नलिखित अधिनियमों और उनके अधीन बनाए गए नियमों की अच्छी प्रकार से जानकारी प्राप्त कर लें:-
1. औषधि और प्रसाधन अधिनियम, 1940
2. औषधि नियंत्रण अधिनियम, 1950
3. औषधि और चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954
4. प्रतिलिप्याधिकार अधिनियम, 1957
5. व्यापार और पण्य वस्तु चिन्ह अधिनियम, 1958
6. खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954
7. भेषजी अधिनियम, 1948
8. पुरस्कार प्रतियोगिता अधिनियम, 1955
9. संप्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम, 1950
10. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986
11. महिला अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986
12. आकाशवाणी / दूरदर्शन संहिता
13. भारतीय विज्ञापन मानक परिषद द्वारा जारी की गई भारत में विज्ञापन के लिए आचार संहिता
14. औषधियों और उपचारों से संबंधित विज्ञापन के संबंध में मानक संहिता (देखें अनुबंध-I)
15. विज्ञापन एजेंसियों के लिए मानक पद्धति (देखें अनुबध - II)
(यह सूची विस्तृत है परन्तु यहीं तक सीमित नहीं है)
2. संहिता
विज्ञापन में आचार के सामान्य नियम
1. विज्ञापन इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि वह देश की विधि के अनुरूप हो और लोगों की नैतिकता, शालीनता