प्रसार भारती अधिनियम और नियम : -
प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) अधिनियम, 1990 (1990 का 25)
(12 सितम्बर, 1990)
भारतीय प्रसारण निगम की, जिसका नाम प्रसार भारती होगा, स्थापना का उपबंध करने, उसके गठन, कृत्य तथा शक्तियां परिनिश्चित करने और उससे संबद्ध या उनके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियम ।
भारत गणराज्य के इकतालीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:
(1) परंतु प्रति वर्ष कम से कम छह अधिवेशन होंगे और एक अधिवेशन और दूसरे अधिवेशन के बीच तीन मास का अंतर नहीं होगा ।
(2) यदि कोई बोर्ड सदस्य अध्यक्ष की अनुमति के बिना बोर्ड के लगातार तीन अधिवेशनों से अनुपस्थित रहता है तो ऐसे बोर्ड सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद रिक्त कर दिया है ।
(3) अध्यक्ष बोर्ड के अधिवेशनों की अध्यक्षता करेगा और यदि वह किसी कारण से किसी अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो कार्यपालक बोर्ड सदस्य और दोनों की अनुपस्थिति में, ऐसे अधिवेशन में उपस्थित बोर्ड सदस्यों द्वारा निर्वाचित कोई अन्य बोर्ड सदस्य, अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा ।
(4) बोर्ड के किसी अधिवेशन में उपस्थित सभी प्रश्नों का विनिश्चय उपस्थित और मत देने वाले बोर्ड सदस्यों के बहुमत से किया जाएगा और मत बराबर होने की दशा में, अध्यक्ष का या उसकी अनुपस्थिति में अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का दूसरा या निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा ।
9. निगम के अधिकारी और अन्य कर्मचारी
(1) ऐसे नियंत्रण, निबंधन और शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, निगम, भर्ती बोर्ड से परामर्श करने के पश्चात् महानिदेशक (आकाशवाणी), महानिदेशक (दूरदर्शन) और ऐसे अन्य अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को, जो आवश्यक हों, नियुक्त कर सकेगा ।
(2) ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती की पद्धति और उससे संबद्ध सभी अन्य विषय तथा ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा की शर्तें ऐसी होंगी जिनका विनियमों द्वारा उपबंध किया जाए ।
10. भर्ती बोर्डों की स्थापना
(1) निगम दिन के पश्चात् यथाशीघ्र और ऐसी रीति से तथा ऐसी शर्तों और निबन्धनों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, धारा 9 के प्रयोजनों के लिए एक या अधिक भर्ती बोर्डों की स्थापना करेगा जिसमें ऐसे व्यक्ति होंगे जो निगम के सदस्य, अधिकारी और अन्य कर्मचारी नहीं हैं :
परंतु ऐसे पदों पर, जिनके वेतनमान केंद्रीय सरकार के संयुक्त सचिव के वेतनमान से कम नहीं हैं, नियुकित के प्रयोजनों के लिए, भर्ती बोर्ड अध्यक्ष, अन्य बोर्ड सदस्य, पदेन बोर्ड सदस्य, नामनिर्दिष्ट बोर्ड सदस्य और निर्वाचित बोर्ड सदस्यों से मिलकर बनेगा ।
(2) भर्ती बोर्ड गठित करने वाले सदस्यों की अर्हताएं और सेवा की अन्य शर्तें और वह अवधि, जिसके लिए वे पदधारण करेंगे ऐसी होंगी जो विहित की जाएं ।
11. विद्यमान कर्मचारियों की सेवा का निगम को अंतरण
(1) जहां केंद्रीय सरकार ने किन्हीं ऐसे कृत्यों का, जो धारा 12 के अधीन निगम के कृत्य हैं, पालन करना समाप्त कर दिया है वहां केंद्रीय सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह आदेश द्वारा और ऐसी तारीख या तरीखों से, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे किन्हीं अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों को, जो आकाशवाणी या दूरदर्शन में सेवारत हैं और उन कृत्यों का संपादन करने में लगे हुए हैं, निगम को अंतरित कर दें :
परंतु इस उपधारा के अधीन कोई आदेश आकाशवाणी या दूरदर्शन के किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी के संबंध में नहीं किया जाएगा जिसने ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को निगम को अंतरित किए जाने की केंद्रीय सरकार की प्रस्थापना की बाबत, निगम का कर्मचारी न बनने का अपना आशय ऐसे समय के भीतर, जो केंद्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, प्रज्ञापित कर दिया है ।
(2) उपधारा (1) के उपबंध भारतीय सूचना सेवा, केंद्रीय सचिवालय सेवा या किसी अन्य सेवा को या आकाशवाणी तथा दूरदर्शन बाह्य काडरों के ऐसे व्यक्तियों को भी लागू होंगे, जो नियत दिन से ठीक पूर्व आकाशवाणी या दूरदर्शन में कार्य कर रहे हैं :
परंतु जहां कोई ऐसा सदस्य, निगम का कर्मचारी न बनने का और प्रतिनियुक्ति पर बने रहने का अपना आशय उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर प्रज्ञापित करता है वहां उसे ऐसे निबंधनों और शर्तों के अनुसार, जो विहित की जाएं, प्रतिनियुक्ति पर बने रहने के लिए अनुज्ञात किया जा सकेगा ।
(3) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश करते समय केंद्रीय सरकार, यथाशक्य उन कृत्यों पर, जिनका पालन करना, यथास्थिति, आकाशवाणी या दूरदर्शन ने समाप्त कर दिया है या समाप्त कर देता है और उन क्षेत्रों पर जिनमें ऐसे कृत्यों का पालन किया गया है या किया जाता है, विचार करेगी ।
(4) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश द्वारा अंतरित कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी, अंतरण की तारीख से ही केंद्रीय सरकार का कर्मचारी नहीं रह जाएगा और ऐसे पदनाम सहित, जो निगम अवधारित करे, निगम का कर्मचारी हो जाएगा और उपधारा (5) और उपधारा (6) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, पारिश्रमिक और सेवा की अन्य शर्तों की बाबत, जिनके अंतर्गत पेंशन, छुट्टी और भविष्य निधि भी है, ऐसे विनियमों द्वारा शासित होगा जो बनाए जाएं और तब तक निगम का अधिकारी या अन्य कर्मचारी बना रहेगा जब तक उसका नियोजन निगम द्वारा समाप्त कर दिया जाता है ।
(5) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश द्वारा अंतरित प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी, अंतरण की तारीख से छह मास के भीतर अपने इस विकल्प का प्रयोग लिखित रूप में करेगा कि वह -
(क) उस वेतनमान से, जो अंतरण की तारीख से ठीक पूर्व आकाशवाणी या दूरदर्शन में उसके द्वारा धारित पद को लागू था या उस वेतनमान से, जो निगम के अधीन उस पद को जिस पर उसे अंतरित किया गया है, लागू है, शासित होगा;
(ख) समय-समय पर यथा संशोधित केंद्रीय सरकार के नियमों या आदेशों के अनुसार केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों को अनुज्ञेय छुट्टी, भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति या सेवांत प्रसुविधाओं से, या विनियमों के अधीन निगम के कर्मचारियों को अनुज्ञेय छुट्टी, भविष्य निधि या अन्य सेवांत प्रसुविधाओं से, शासित होगा,
और ऐसा विकल्प इस अधिनियम के अधीन एक बार प्रयुक्त किए जाने पर अंतिम होगा:
परंतु किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी द्वारा खंड (क) के अधीन प्रयुक्त विकल्प निगम के अधीन केवल उस पद की बाबत लागू होगा जिस पर ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को अंतरित किया गया है और निगम के अधीन किसी उच्चतर पद पर नियुक्त होने पर वह केवल उस वेतनमान का पात्र होगा जो उस उच्चतर पद को लागू है:
परंतु यह भी कि यदि अपने अंतरण की तारीख से ठीक पूर्व ऐसा कोई अधिकारी या अन्य अधिकारी सरकार के अधीन या तो छुट्टी के कारण हुई किसी रिक्ति में या विनिर्दिष्ट अवधि की किसी अन्य रिक्ति में किसी उच्चतर पद पर स्थानापन्न रूप से कार्य कर रहा है, तो अंतरण होने पर उसका वेतन ऐसी रिक्ति की अनवसित अवधि के लिए संरक्षित किया जाएगा और तत्पश्चात वह उस वेतनमान का, जो सरकार के अधीन उस पद को लागू है जिस पर वह परिवर्तित होता या उस वेतनमान का, जो निगम के अधीन उस पद को लागू है जिस पर उसे अंतरित किया गया है, इन दोनों में से जिसके लिए भी वह अपने विकल्प का प्रयोग करे, हकदार होगा:
परंतु यह भी कि जब कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जो संघ के सूचना और प्रसारण मंत्रालय या उसके किसी संलग्न या अधीनस्थ कार्यालयों में सेवारत है, ऐसे किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी के, जो उस मंत्रालय या कार्यालय में ऐसे अंतरण के पूर्व उससे ज्येष्ठ था, निगम को अंतरित किए जाने के पश्चात््, उस मंत्रालय या कार्यालय में किसी उच्चतर पद पर स्थानापन्न रूप से कार्य करने के लिए प्रोन्नत किया जाता है, तो वह अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जिसे ऐसे उच्चतर पद पर स्थानापन्न रूप से कार्य करने के लिए प्रोन्नत किया जाता है, निगम को अंतरित किए जाने पर, केवल उस वेतनमान का, जो उस पद को लागू है जिसे वह, यदि प्रोन्नति न हुई होती तो, धारित करता या उस वेतनमान का, जो निगम के अधीन उस पद को लागू है जिस पर अंतरित किया गया है, इन दोनों में से जिसके लिए भी वह अपने विकल्प का प्रयोग करे, हकदार होगा ।
(6) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किए गए किसी आदेश द्वारा अंतरित कोई भी अधिकारी या अन्य कर्मचारी -
(क) निगम के अधीन वैसी ही या समतुल्य नियुक्ति करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के, जैसा विनियमों में विनिर्दिष्ट किया जाए, अधीनस्थ किसी प्राधिकारी द्वारा पदच्युत नहीं किया जाएगा या पद से नहीं हटाया जाएगा;
(ख) ऐसी जांच के पश्चात् ही, जिसमें उसे अपने विरुद्ध आरोपों की सूचना दे दी गई है और इन आरोपों के संबंध में सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दे दिया गया है, पदच्युत किया जाएगा या पद से हटाया जाएगा या पंक्ति से अवनत किया जाएगा, अन्यथा नहीं:
परंतु जहां ऐसी जांच के पश्चात् उस पर ऐसी कोई शास्ति अधिरोपित करने की प्रस्थापना है वहां ऐसी शास्ति ऐसी जांच के दौरान दिए गए साक्ष्य के आधार पर अधिरोपित की जा सकेगा और ऐसे व्यक्ति को प्रस्थापित शास्ति के विषय में अभ्यावेदन करने का अवसर देना आवश्यक नहीं होगा:
परंतु यह और कि खंड (ख) वहां लागू नहीं होगा जहां कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी ऐसे आचरण के आधार पर पदच्युत किया जाता है या पद से हटाया जाता है या पंक्ति से अवनत किया जाता है जिससे कि आपराधिक आरोप पर उसे सिद्धदोष ठहराया गया है ।
12. निगम के कृत्य और शक्तियां
(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निगम का यह प्राथमिक कर्तव्य होगा कि वह जनता को जानकारी देने, शिक्षित करने और उसका मनोरंजन करने के लिए और रेडियो तथा दूरदर्शन पर प्रसारण का संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए लोक प्रसारण सेवाओं का आयोजन और संचालन करे ।
स्पष्टीकरण-- शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के उपबंध भारतीय तार अधिनियम, 1885 (1885 का 13) के उपबंधों के अतिरिक्त, न कि उनके अल्पीकरण में, होंगे ।
(2) निगम अपने कृत्यों के निर्वहन में निम्नलिखित उद्दश्यों से मार्गदर्शन प्राप्त करेगा, अर्थात्:-
(क) देश की एकता और अखंडता तथा संविधान में दिए गए मूल्यों को अक्षुण्ण रखना,
(ख) सार्वजनिक हित के सभी राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय विषयों की निष्पक्ष, सत्य और उद्देश्यपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के नागरिकों के अधिकार को सुरक्षित रखना और सूचना को, जिसके अंतर्गत अपनी कोई राय या विचारधारा का पक्षपोषण किए बिना परस्पर विरोधी विचारों को प्रस्तुत करना भी है, उचित तथा संतुलित रूप से प्रस्तुत करना,
(ग) शिक्षा और साक्षरता के प्रसार, कृषि, ग्रामीण विकास, पर्यावरण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों की ओर विशेष ध्यान देना,
(घ) समुचित कार्यक्रमों के प्रसारण द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों की विविध संस्कृतियों और भाषाओं के पर्याप्त कार्यक्रम देना,
(ङ) क्रीड़ा और खेलकूद के पर्याप्त कार्यक्रम देना जिससे कि स्वस्थ स्पर्धा और खेलकूद की भावना को प्रोत्साहन मिले,
(च) युवकों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर समुचित कार्यक्रम देना,
(छ) महिलाओं की प्रास्थिति और समस्याओं के संबंध में सूचना देना, राष्ट्रीय चेतना जागृत करना तथा महिलाओं के उत्थान के लिए विशेष ध्यान देना,
(ज) सामाजिक न्याय की अभिवृद्धि करना तथा शोषण, असमानता और अस्पृश्यता जैसी बुराइयों का सामना करना तथा समाज के दुर्बल वर्गों के कल्याण को अग्रसर करना,
(झ) श्रमजीवी वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके कल्याण को अग्रसर करना,
(ञ) ग्रामीण जनता और जनता के दुर्बल वर्गों तथा सीमावर्ती प्रदेशों, पिछड़े या दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों की सेवा करना,
(ट) अल्पसंख्यकों और जनजाति समुदायों की विशेष आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए समुचित कार्यक्रम देना,
(ठ) बालकों, अंधों, वृद्धों, विकलांगों तथा अन्य निर्बल वर्ग के लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए विशेष उपाय करना,
(ड) भारत की भाषाओं में संप्रेषण में वृद्धि करते हुए इस प्रकार प्रसारण करना जिससे राष्ट्रीय एकता की अभिवृद्धि हो, और प्रत्येक राज्य में उस राज्य की भाषाओं में प्रादेशिक सेवाओं का विस्तार करना,
(ढ) समुचित प्रौद्योगिकी को चुनकर और उपलब्ध प्रसारण आवृत्ति का सर्वोत्तम उपयोग करके व्यापक प्रसारण कार्यक्रम देना और यह सुनिश्चित करना कि ग्राह्यता उच्च कोटि की हो,
(ण) रेडियो और दूरदर्शन प्रसारण प्रौद्योगिकी को निरंतर अद्यतन बनाए रखने के लिए अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, और
(त) विभिन्न स्तरों पर पारेषण के अतिरिक्त चैनल स्थापित करके प्रसारण सुविधाओं का विस्तार करना ।
(3) विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निगम निम्नलिखित कार्य करने के लिए ऐसे उपाय कर सकेगा जो यह ठीक समझे, अर्थात् :-
(क) यह सुनिश्चित करना कि कार्यक्रमों को देने और बनाने के लिए प्रसारण का संचालन लोक सेवा के रूप में हो रहा है,
(ख) रेडियो और दूरदर्शन के लिए समाचार-संग्रह प्रणाली की स्थापना करना,
(ग) प्रसारण के लिए खेलकूद और अन्य आयोजनों, फिल्मों, धारावाहिकों, अवसरों, अधिवेशनों, समारोहों या सार्वजनिक रुचि की अन्य घटनाओं की बाबत कार्यक्रमों और अधिकारों या विशेषाधिकारों का क्रय करना या अन्यथा अर्जित करने के लिए बातचीत करना और सेवाओं के लिए ऐसे कार्यक्रमों, अधिकारों या विशेषाधिकारों के आबंटन की प्रक्रिया स्थापित करना,
(घ) रेडियो, दूरदर्शन और अन्य सामग्री के पुस्तकालय या पुस्तकालयों की स्थापना करना और उनका अनुरक्षण करना,
(ङ) समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम, श्रोता अनुसंधान, विपणन या तकनीकी सेवा संचालित करना या कराना जो ऐसे व्यक्तियों को और ऐसी रीति से तथा ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए दिए जा सकें जो निगम ठीक समझे,
(च) ऐसी अन्य सेवाओं की व्यवस्था करना, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं ।
(4) उपधारा (2) और उपधारा (3) की कोई बात निगम को केंद्रीय सरकार की ओर से और ऐसे निबंधनों और शर्तों के अनुसार जो उस सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, विदेश सेवा के प्रसारण का प्रबंध करने और केंद्रीय सरकार द्वारा व्ययों की प्रतिपूर्ति के लिए किए गए ठहरावों के आधार पर भारत के बाहर के संगठनों द्वारा किए गए प्रसारणों का अनुश्रवण करने से निवारित नहीं करेगी ।
(5) यह सुनिश्चित करने के प्रयोजनों के लिए इस धारा में उपवर्णित उद्देश्यों की अभिवृद्धि के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध किया जाए, केंद्रीय सरकार को विज्ञापनों के बारे में प्रसार-समय की अधिकतम सीमा अवधारित करने की शक्ति होगी ।
(6) निगम किसी सिविल दायित्व के अधीन केवल इस कारण नहीं होगा कि वह इस धारा के किसी उपबंध का अनुपालन करने में असफल रहा है ।
(7) निगम को विज्ञापनों और ऐसे कार्यक्रमों के लिए या उनकी बाबत, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, फीस और अन्य सेवा प्रभार अवधारित और उद्गृहीत करने की शक्ति होगी :
परंतु इस उपधारा के अधीन उद्गृहीत और संगृहीत फीस तथा अन्य सेवा प्रसार ऐसी सीमाओं से अधिक नहीं होंगे जो केंद्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर अवधारित की जाएं ।
13. संसदीय समिति
(1) एक समिति का गठन किया जाएगा जो संसद के बाईस सदस्यों से मिलकर बनेगी जिसमें अनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा, लोक सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित लोक सभा के पंद्रह सदस्य और राज्य सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित राज्य सभा के सात सदस्य होंगे जो इस बात की निगरानी रखेंगे कि निगम अपने कृत्यों का निर्वहन इस अधिनियम के उपबंधों और विशेष रूप से धारा 12 में उपवर्णित उसके उद्देश्यों के अनुसार करता है और वह उस पर संसद को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी ।
(2) समिति ऐसे नियमों के अनुसार कार्य करेगी जो लोक सभा के अध्यक्ष द्वारा बनाए जाएं ।
प्रसारण परिषद् की स्थापना, उसके सदस्यों की पदावधि और उनका हटाया जाना, आदि
नियत दिन के पश्चात् यथासंभव शीघ्र, अधिसूचना द्वारा, प्रसारण परिषद् के नाम से ज्ञात एक परिषद् की स्थापना की जाएगी जो धारा 15 में निर्दिष्ट परिवादों को ग्रहण करेगी और उन पर विचार करेगी और धारा 12 में उपवर्णित उद्देश्यों के अनुसार निगम को उसके कृत्यों के निर्वहन में सलाह देगी ।
(2) प्रसारण परिषद् निम्नलिखित से मिलकर बनेगी --
(क) एक अध्यक्ष और दस अन्य सदस्य जो भारत के राष्ट्रपति द्वारा सार्वजनिक जीवन में विख्यात व्यक्तियों में से नियुक्त किए जाएंगे,
(ख) संसद के चार सदस्य, जिनमें से लोक सभा के दो सदस्य उसके अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे और राज्य सभा के दो सदस्य उसके सभापति द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ।
(3) प्रसारण परिषद् का अध्यक्ष पूर्णकालिक सदस्य होगा और प्रत्येक अन्य सदस्य अंशकालिक सदस्य होगा तथा अध्यक्ष या अंशकालिक सदस्य उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, तीन वर्ष की अवधि के लिए उस रूप में पद धारण करेगा ।
(4) प्रसारण परिषद् उतनी प्रादेशिक परिषदें गठित कर सकेगी जितनी वह परिषद् की, उसके कृत्यों के निर्वहन में, सहायता करने के लिए आवश्यक समझे ।
(5) प्रसारण परिषद् का अध्यक्ष ऐसे वेतन और भत्तों का हकदार होगा और छुट्टी, पेंशन (यदि कोई हों), भविष्य निधि और अन्य विषयों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन होगा जो विहित की जाएं:
परंतु प्रसारण परिषद् के अध्यक्ष के वेतन तथा भत्तों और सेवा की शर्तों में, उसकी नियुक्ति के पश्चात् उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा ।
(6) प्रसारण परिषद् के अन्य सदस्य और उपधारा (4) के अधीन गठित प्रादेशिक परिषदों के सदस्य ऐसे भत्तों के हकदार होंगे जो विहित किए जाएं ।
15. प्रसारण परिषद् की अधिकारिता और उसके द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया
(1) प्रसारण परिषद् निम्नलिखित से परिवाद ग्रहण करेगी और उन पर विचार करेगी, अर्थात्:-
(क) कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह जो यह अभिकथित करता है कि कोई कार्यक्रम या प्रसारण या निगम का विनिर्दिष्ट मामलों में या साधारणतया कार्यकरण उन उद्देश्यों के अनुसार नहीं है जिनके लिए निगम स्थापित किया गया है,
(ख) कोई व्यक्ति (निगम के किसी अधिकारी या कर्मचारी से भिन्न) जो यह दावा करता है कि निगम के किसी कार्यक्रम के प्रसारण के संबंध में उसके साथ किसी रीति से अन्यायपूर्ण या अनुचित व्यवहार किया गया है (जिसके अंतर्गत उसकी एकांतता का अनधिकृत अतिक्रमण, दुर्व्यपदेशन, विकृति या वस्तुनिष्ठता का अभाव है) ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई परिवाद ऐसी रीति से और ऐसी अवधि के भीतर किया जाएगा जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।
(3) जो परिवाद प्रसारण परिषद् को प्राप्त होते हैं उन्हें निपटाने के लिए परिषद् ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगी जो वह ठीक समझे ।
(4) यदि परिवाद पूर्णत: या भागत: न्यायोचित पाया जाता है तो प्रसारण परिषद् कार्यपालक बोर्ड सदस्य को समुचित कार्रवाई करने के लिए सलाह देगी ।
(5) यदि कार्यपालक बोर्ड सदस्य प्रसारण परिषद् की सिफारिश को स्वीकार करने में असमर्थ हैं तो वह ऐसी सिफारिश को बोर्ड के समक्ष विनिश्चय के लिए रखेगा ।
(6) यदि बोर्ड भी प्रसारण परिषद् की सिफारिश को स्वीकार करने में असमर्थ है, तो वह उसके लिए अपने कारण अभिलिखित करेगा और तदनुसार प्रसारण परिषद् को सूचित करेगा ।
उपधारा (5) और उपधारा (6) में किसी बात के होते हुए भी, जहां प्रसारण परिषद् यह समुचित समझे, वहां वह ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, निगम से किसी परिवाद के बारे में अपनी सिफारिशों का प्रसार ऐसी रीति में करने की अपेक्षा कर सकेगी जैसी परिषद् ठीक समझे ।
अध्याय 3
आस्तियां, वित्त और लेखे
17. केंद्रीय सरकार की कतिपय आस्तियों, दायित्वों, आदि का निगम को अन्तरण-नियत दिन से हीज्
(क) ऐसी सभी संपत्ति और आस्तियां (जिनके अंतर्गत अव्यपगमनीय निधि भी है) जो आकाशवाणी या दूरदर्शन या दोनों के प्रयोजन के लिए उस दिन से ठीक पहले केंद्रीय सरकार में निहित थी, निगम को, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो केंद्रीय सरकार अवधारित करे अंतरित हो जाएंगी और ऐसी सभी संपत्तियों और आस्तियों का बही मूल्य केंद्रीय सरकार द्वारा या निगम को दी गई पूंजी समझा जाएगा,
(ख) आकाशवाणी या दूरदर्शन या दोनों के प्रयोजनों के लिए या उनके संबंध में केंद्रीय सरकार द्वारा या उसके साथ या उसके लिए उस दिन से ठीक पहले उपगत सभी ऋण, बाध्यताएं और दायित्व, की गई सभी संविदाएं और किए जाने के लिए वचनबद्ध सभी मामले और बातें उस निगम द्वारा उसके साथ या उसके लिए उपगत की गई या किए जाने के लिए वचनबद्ध समझी जाएंगी,
(ग) आकाशवाणी या दूरदर्शन या दोनों के संबंध में केंद्रीय सरकार को उस दिन के ठीक पहले देय सभी धनराशियां निगम को देय समझी जाएंगी,
(घ) आकाशवाणी या दूरदर्शन या दोनों से संबंधित किसी विषय की बाबत केंद्रीय सरकार द्वारा उसके विरुद्ध उस दिन के ठीक पहले संस्थित किए गए या संस्थित किए जा सकने वाले सभी वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियां निगम द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकेंगी या संस्थित की जा सकेंगी ।
17. केंद्रीय सरकार द्वारा अनुदान, आदि
निगम को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्ष निर्वहन में समर्थ बनाने के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार, संसद द्वारा इस निर्मित विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् निगम को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में--
(क) प्रसारण ग्राही अनुज्ञप्ति फीस के आगम का, यदि कोई हों, उसमें से संग्रहण प्रभार घटाकर, और
(ख) ऐसी अन्य धनराशियों का, जो वह सरकार आवश्यक समझे इक्विटी, सहायता अनुदान या उधार के रूप में संदाय कर सकेगी ।
18. निगम की निधि
(1) निगम की अपनी निधि होगी और निगम की प्राप्तियां (जिनके अंतर्गत धारा 16 के अधीन निगम को अन्तरित रकमें भी हैं) निधि में जमा की जाएंगी और निगम द्वारा सभी संदाय उसमें से किए जाएंगे ।
(2) निधि का सभी धन किसी एक या अधिक राष्ट्रीयकृत बैंकों में ऐसी रीति से जमा किया जाएगा जो निगम विनिश्चित करे ।
(3) निगम इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के लिए ऐसी धनराशियां व्यय कर सकेगा जो वह ठीक समझे और ऐसी धनराशियों को निगम की निधि में से संदेय व्यय माना जाएगा।
स्पष्टीकरण-- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ङराष्ट्रीयकृत बैंकच् से बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई तत्स्थानी नया बैंक या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई तत्स्थानी नया बैंक अभिप्रेत है।
19. धन का विनिधान
निगम अपने धन का विनिधान केंद्रीय सरकार की या किसी राज्य सरकार की प्रतिभूतियों में या ऐसी अन्य रीति से कर सकेगा जो विहित की जाए ।
20. निगम का वार्षिक वित्तीय विवरण
(1) निगम प्रत्येक वित्तीय वर्ष में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए वार्षिक वित्तीय विवरण तैयार करेगा जिसमें-
(क) वह व्यय पृथक रूप से दिखाया जाएगा जिसको निगम के आंतरिक साधनों से पूरा करने का प्रस्ताव है, और --
(ख) वे धनराशियां पृथक् रूप से दिखाई जाएंगी जो अन्य व्ययों को पूरा करने के लिए केंद्रीय सरकार से अपेक्षित हैं, और --
राजस्व व्यय को अन्य व्यय से, और
योजनेत्तर व्यय को योजना व्यय से,
अलग दिखाया जाएगा ।
(2) वार्षिक वित्तीय विवरण ऐसे प्रारूप में तैयार किया जाएगा और अनुमोदन के लिए केंद्रीय सरकार को ऐसे समय पर भेजा जाएगा जो उस सरकार और निगम द्वारा तय पाया जाए ।
21. निगम के लेखा और उनकी संपरीक्षा
(1) निगम उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण ऐसे प्रारूप में और ऐसी रीति से तैयार करेगा जो विहित की जाए ।
(2) निगम के लेखाओं की संपरीक्षा भारत के नियंत्रक-महालेखा-परीक्षक द्वारा ऐसे अंतरालों पर की जाएगी जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं और ऐसी संपरीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय निगम द्वारा नियंत्रक-महालेखा-परीक्षक को संदेय होगा ।
(3) नियंत्रक-महालेखा-परीक्षक के और निगम के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के उस संपरीक्षा के संबंध में वे ही अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो नियंत्रक-महालेखा-परीक्षक के सरकारी लेखाओं का संपरीक्षा के संबंध में होते हैं और उसे विशिष्ट रूप से बहियां, लेखा, संबंधित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों तथा कागजपत्रों के पेश किए जाने की मांग करने और निगम के किसी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियंत्रक-महालेखा-परीक्षक द्वारा या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित निगम के लेखे, उनकी संपरीक्षा रिपोर्ट के साथ, प्रतिवर्ष केंद्रीय सरकार को भेजे जाएंगे और केंद्रीय सरकार उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
22. निगम का कर के दायित्वाधीन न होना
आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) में या आय-कर, या आय, लाभ या अभिलाभ पर किसी अन्य कर से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति में किसी बात के होते हुए भी, निगम निम्नलिखित के बारे में कोई आय-कर या अन्य कर का संदाय करने के दायित्वाधीन नहीं होगा, अर्थात् :--
निगम की निधि से प्रोद्भूत या उद्भूत कोई आय, लाभ या प्रतिलाभ या ऐसी निधि में प्राप्त कोई रकम, और
निगम को व्युत्पन्न कोई आय, लाभ या अभिलाभ अथवा उसके द्वारा प्राप्त कोई रकम ।
अध्याय 4
प्रकीर्ण
23. निदेश देने की केंद्रीय सरकार की शक्ति
(1) केंद्रीय सरकार, समय-समय पर और जब भी अवसर उत्पन्न हो निगम को भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता या राज्य की सुरक्षा या लोक व्यवस्था बनाए रखने के हित में ऐसे निदेश दे सकेगी जो वह आवश्यक समझे जिसमें वह उससे यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह निदेश में विनिर्दिष्ट विषय पर प्रसारण न करे या निदेश में विनिर्दिष्ट लोक महत्व के किसी विषय पर कोई प्रसारण करे ।
(2) जहां निगम उपधारा (1) के अधीन दिए गए निदेश के अनुसरण में कोई प्रसारण करता है वहां ऐसे प्रसारण के साथ, यदि निगम ऐसी वांछा करे तो इस तथ्य की घोषणा की जा सकेगी कि ऐसा प्रसारण ऐसे निदेश के अनुसरण में किया गया है ।
(3) उपधारा (1) के अधीन दिए गए प्रत्येक निदेश की एक प्रति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।
24. केंद्रीय सरकार की जानकारी अभिप्राप्त करने की शक्ति
केंद्रीय सरकार निगम से ऐसी जानकारी देने की अपेक्षा कर सकेगा जैसी वह सरकार आवश्यक समझे ।
25. कतिपय विषयों में संसद को रिपोर्ट और बोर्ड के विरुद्ध कार्रवाई के बारे में सिफारिशें
(1) जहां बोर्ड धारा 23 के अधीन दिए गए किन्हीं निदेशों के अनुपालन के बार-बार व्यतिक्रम करता है या धारा 24 के अधीन अपेक्षित जानकारी देने में असफल रहता है वहां केंद्रीय सरकार उसकी एक रिपोर्ट तैयार कर सकेगी और उसे संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, संसद को यह सिफारिश प्राप्त करने के लिए रख सकेगी कि बोर्ड के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाए (जिसके अन्तर्गत बोर्ड का अतिष्ठित किया जाना भी हो सकता है) ।
(2) संसद की सिफारिश पर, राष्ट्रपति, अधिसूचना द्वारा, बोर्ड को छह माह से अनधिक ऐसी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अतिष्ठित कर सकेगा :
परंतु इस उपधारा के अधीन अधिसूचना निकालने के पूर्व, राष्ट्रपति बोर्ड को यह हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर देगा कि उसे क्यों न अतिष्ठित कर दिया जाए और बोर्ड के स्पष्टीकरणों और आक्षेपों पर, यदि कोई हों, विचार करेगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन अधिसूचना के प्रकाशन पर --
सभी बोर्ड सदस्य, अतिष्ठित किए जाने की तारीख से अपना पद रिक्त कर देंगे,
ऐसी सभी शक्तियों, कृत्यों और कर्तव्यों का, जिनका इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से प्रयोग या निर्वहन किया जा सकता है, इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के पुर्नगठित किए जाने तक, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा, जिन्हें राष्ट्रपति निदेश दें, प्रयोग और निर्वहन किया जाएगा ।
(4) उपधारा (2) के अधीन निकाली गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अतिष्ठित किए जाने की अवधि के अवसान पर, राष्ट्रपति नई नियुक्तियों द्वारा बोर्ड को पुनगर्ठित कर सकेगा और ऐसे किसी मामले में कोई ऐसा व्यक्ति जिसने उपधारा (3) के खंड (क) के अधीन अपना पद रिक्त किया था, नियुक्ति के लिए निरर्हित नहीं होगा :
परंतु राष्ट्रपति अतिष्ठित किए जाने की अवधि के अवसान के पूर्व किसी भी समय इस उपधारा के अधीन कार्रवाई कर सकेगा ।
(5) केंद्रीय सरकार उपधारा (2) के अधीन निकाली गई अधिसूचना को और इस धारा के अधीन की गई कार्रवाई की पूर्ण रिपोर्ट को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
26. सदस्य के पद से संसद के किसी सदस्य का निरर्हित न होना
यह घोषित किया जाता है कि प्रसारण परिषद् के या धारा 13 के अधीन गठित समिति के सदस्य का पद उसके धारक को संसद के किसी सदन का सदस्य चुने जाने के लिए या सदस्य होने के लिए निरर्हित नहीं करेगा ।
27. अध्यक्ष, बोर्ड सदस्यों, आदि का लोक सेवक होना
निगम का अध्यक्ष और प्रत्येक अन्य बोर्ड सदस्य, प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी तथा उसकी समिति का प्रत्येक सदस्य, प्रसारण परिषद् का अध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य या प्रादेशिक परिषद् या भर्ती बोर्ड का प्रत्येक सदस्य भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।
28. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण
इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या विनियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए कोई आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही, निगम के या निगम के अध्यक्ष, किसी बोर्ड सदस्य या अधिकारी या अन्य कर्मचारी के या प्रसारण परिषद् के अध्यक्ष या किसी सदस्य के या प्रादेशिक परिषद् या भर्ती बोर्ड के किसी सदस्य के विरुद्ध न होगी ।
29. निगम के आदेशों और अन्य लिखतों का अधिप्रमाणन
निगम के सभी आदेश और विनिश्चय अध्यक्ष के या इस निमित्त निगम द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य बोर्ड सदस्य के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित किए जाएंगे और निगम द्वारा निष्पादित सभी अन्य लिखतें कार्यपालक सदस्य के या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत निगम के किसी अधिकारी के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित की जाएंगी ।
30. शक्तियों का प्रत्यायोजन
निगम, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, नियम के अध्यक्ष या किसी अन्य बोर्ड सदस्य या किसी अधिकारी को, ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो उनमें विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कर्तव्यों को, जो वह उचित समझे, प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
31. वार्षिक रिपोर्ट
(1) निगम प्रत्येक कलैण्डर वर्ष में एक बार ऐसे प्रारूप में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का (जिसके अन्तर्गत प्रसारण परिषद् द्वारा की गई सिफारिशों और दिए गए सुझाव और उन पर की गई कार्यवाही भी है) पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी प्रतियां केंद्रीय सरकार को भेजी जाएंगी और वह सरकार उसे संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
(2) प्रसारण परिषद् प्रत्येक कलैंडर वर्ष में एक बार, ऐसे प्रारूप में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगी जिसमें पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी प्रतियां केंद्रीय सरकार को भेजी जाएंगी और वह सरकार उसे संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
32. नियम बनाने की शक्ति
(1) केंद्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टता और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :--.
क. धारा 6 की उपधारा (7) के अधीन पूर्णकालिक बोर्ड सदस्यों के संबंध में वेतन और भत्ते तथा छुट्टी, पेंशन (यदि कोई हो), भविष्य निधि और अन्य विषयों के बारे में सेवा की शर्तें,
ख. धारा 6 की उपधारा (8) के अधीन अध्यक्ष और अंशकालिक बोर्ड सदस्यों को संदेय भत्ते,
ग. वे नियंत्रण, निबंधन और शर्तें जिनके अधीन रहते हुए धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन निगम अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगी,
घ. वह रीति जिससे तथा वे शर्तों और निबंधन जिनके अधीन रहते हुए धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन भर्ती बोर्ड की स्थापना की जा सकेगी,
ङ. धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन भर्ती बोर्ड के सदस्यों की अर्हताएं और सेवा की अन्य शर्तें तथा उनकी पदावधि,
च. वे निबंधन और शर्तें जिनके अनुसार धारा 11 की उपधारा (2) के अधीन प्रतिनियुक्ति विनियमित की जा सकेगी,
छ. धारा 14 की उपधारा (5) के अधीन प्रसारण परिषद् के अध्यक्ष का वेतन और भत्ते और छुट्टी, पेंशन (यदि कोई हो), भविष्य निधि तथा अन्य विषयों के बारे में सेवा की शर्तें,
ज. धारा 14 की उपधारा (6) के अधीन प्रसारण परिषद् के अन्य सदस्यों और प्रादेशिक परिषदों के सदस्यों को संदेय भत्ते,
झ. वह रीति जिससे निगम धारा 19 के अधीन अपने धन का विनिधान कर सकेगा,
ञ. वह प्रारूप जिसमें और वह रीति जिससे धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन लेखाओं का वार्षिक विवरण तैयार किया जाएगा,
ट. वह प्रारूप जिसमें और वह समय जिसके भीतर निगम और प्रसारण परिषद् धारा 31 के अधीन अपनी वार्षिाक रिपोर्ट तैयार करेंगे,
ठ. कोई अन्य विषय जिसका विहित किया जाना अपेक्षित है या जो विहित किया जाए ।
33. विनियम बनाने की शक्ति
(1) निगम इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने में अपने को समर्थ बनाने के लिए ऐसे विनियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगा जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्:--
(क) वह रीति जिससे और वे प्रयोजन जिनके लिए निगम किसी व्यक्ति को धारा 3 की उपधारा (7) के अधीन अपने साथ सहयोजित कर सकेगा,
(ख) धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन वह समय जब और वे स्थान जहां बोर्ड के अधिवेशन होंगे और ऐसे अधिवेशनों में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और बोर्ड के अधिवेशन के कार्य संचालन के लिए आवश्यक गणपूर्ति,
(ग) धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन निगम के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती की पद्धति और सेवा की शर्तें,
(घ) धारा 11 की उपधारा (4) के अधीन निगम के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के संबंध में पारिश्रमिक और सेवा की अन्य शर्तें, जिनके अंतर्गत पेंशन, छुट्टी और भविष्य निधि भी है,
(ङ) धारा 11 की उपधारा (6) के खंड (क) के अधीन कतिपय नियुक्तियां करने के सक्षम प्राधिकारी,
(च) धारा 12 की उपधारा (3) के खंड (च) के अधीन वे सेवाएं जो निगम द्वारा प्रदान की जा सकेंगी,
(छ) धारा 12 की उपधारा (7) के अधीन, विज्ञापनों और अन्य कार्यक्रमों की बाबत फीसों और अन्य सेवा प्रभावों का अवधारण और उद्ग्रहण,
(ज) धारा 15 की उपधारा (2) के अधीन वह रीति जिसमें और वह अवधि जिसके भीतर परिवाद किए जा सकेंगे,
(झ) कोई अन्य विषय जिसकी बाबत इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के लिए उपबंध करना निगम की राय में आवश्यक है :
परंतु खंड (ग) या खंड (घ) के अधीन विनियम केवल केंद्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से ही बनाए जाएंगे ।
34. नियमों और विनियमों का संसद के समक्ष रखा जाना
इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात््, वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि यह नियम या विनियम नहीं बनाना चाहिए तो तत्पश्चात, वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
35. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति
यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों, और जिन्हें वह उस कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक समझे:
परंतु ऐसा कोई आदेश नियत दिन के तीन वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।