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डीसीडी के बारे में
विकास संप्रेषण प्रभाग
 लोक सेवा प्रसारण के लिए निधि व्यवस्था का एक मॉडल
भारत में विकास संप्रेषण
About the

 

विकास संप्रेषण प्रभाग

 

विकासोन्मुखी मामलों को प्रकाश में लाने की सामाजिक जिम्मेदारी को निभाने और सरकारी विभागों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संप्रेषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दूरदर्शन ने 2001 में विकास संप्रेषण प्रभाग की स्थापना की ।

 

यह संकल्पना मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों सहित सरकारी भागीदारों से निधि प्राप्त करके राजस्व जुटाने की आवश्यकता के फलस्वरूप उत्पन्न हुई । राजस्व जुटाने की इस अद्वितीय योजना में प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर प्रसारण समय (एयर टाइम) बेचकर आय प्राप्त करने की परिकल्पना की गई है ।

 

ग्राम्य विकास अभियान

 

विकास संप्रेषण प्रभाग ने ग्राम्य विकास मंत्रालय के लिए एक द्वि माध्यम, रेडियो और टेलीविजन अभियान के साथ आशाजनक शुरुआत की है । ग्राम्य विकास अभियान बड़े पैमाने पर चलाया गया था । ग्रामीण दर्शकों के लिए प्रसारण एवं पहुंच की दृष्टि से नेटवर्क की शक्ति को बढ़ाते हुए इसकी संकल्पना प्रसार भारती के समस्त संसाधनों (कार्यक्रम, इंजीनियरी और अनुसंधान) का अधिकतम उपयोग करने के उद्देश्य से की गई     थी । लोक सेवा प्रसारक की भूमिका को पुन: स्थापित करने और सृजनात्मक स्व-निर्माण क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए प्रभाग ने इस महान चुनौती को स्वीकार किया ।

 

राष्टरीय, क्षेत्रीय और राज्य स्तर पर क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की गईं । ग्रामीण विकास मंत्रालय और संबंधित राज्य सरकारों के अधिकारियों के साथ-साथ लगभग 2500 व्यक्तियों को इलैक्टरॉनिक मीडिया का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया गया । इन कार्यशालाओं के उपरांत एक दूसरे के कार्मिकों को प्राप्त अनुभवों एवं लाभों को बांटने के लिए आकाशवाणी और दूरदर्शन केन्द्रों के निदेशकों की समन्वय बैठकें आयोजित की गईं । इन बैठकों के दौरान जिन प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया वे इस प्रकार थे- रिकार्ड की जाने योग्य सफलता की घटनाएं, साप्ताहिक पूर्व-परीक्षण अनुसूची, द्वि माध्यम प्रचार योजनाएं । ग्राम्य विकास अभियान का मुख्य उद्देश्य लक्षित दर्शकों में जागरूकता उत्पन्न करना था । इसमें मकान, सड़क, पेय जल और सफाई जैसे क्षेत्रों में मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने पर बल दिया गया था । 29 भाषाओं और बोलियों में कार्यक्रमों के माध्यम से 6,00,000 गांवों को कवर करने वाली मंत्रालय की लगभग एक दर्जन योजनाओं के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए कार्यक्रमों का निर्माण करने और प्रसारित करने में आकाशवाणी के लगभग 150 केंद्रों और दूरदर्शन के 32 केंद्रों को शामिल किया गया ।

 

     इस प्रयास के फलस्वरूप 1008 कार्यक्रम बनाए गए । दूरदर्शन ने लोक सेवा के विज्ञापन बनाने के प्रयोग भी किए । विभिन्न भाषाई और सांस्कृतिक क्षेत्रों की सफलता की घटनाओं के परस्पर आदान-प्रदान से इस अभियान की सफलता में बड़ी सहायता मिली इससे दर्शकों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की पद्धतियों का अनुसरण करने के लिए भी प्रोत्साहन मिला है ।

 

     दर्शक अनुसंधान सर्वेक्षण से पता चला है कि अभियान के बाद मंत्रालय की ग्राम्य विकास योजनाओं के बारे में 69.4% लक्षित दर्शकों में जागरूकता उत्पन्न हुई है ।

 

     उपयोग किए गए विभिन्न फार्मेटों में दूरदर्शन केन्द्र, जयपुर द्वारा निर्मित एक टेली-डरामा को वर्ष 2002 के सर्वोत्तम दूरदर्शन धारावाहिक का पुरस्कार प्राप्त हुआ था ।

 

     पिछले चार वर्षों से दूरदर्शन के 22 केंद्रों से ग्रामीण विकास के बारे में 15 मिनट का एक कार्यक्रम प्रसारित किया जा रहा है ।

 

एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता

 

दूरदर्शन-बीबीसी-नाको की भागीदारी

 

विकास संप्रेषण प्रभाग ने वर्ष 2001 में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट (बीबीसी डब्ल्यूएसटी) और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के साथ एक भागीदारी पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य मीडिया का प्रभावी ढंग से उपयोग करके सामाजिक विकास को बढ़ावा देना था । आरंभ में दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में एचआईवी/ एड्स के संबंध में एक अभियान शुरू किया गया था । अभियान का पहला कार्यक्रम जून, 2002 में प्रसारित किया गया था तथा इसमें लोक सेवा विज्ञापन (स्पॉट्स), जासूसी धारावाहिक जासूस विजय और एक युवा टेलीविजन शो हाथ से हाथ मिला का निर्माण एवं प्रसारण शामिल था । विकास संप्रेषण प्रभाग ने जासूस विजय को प्राइम टाइम स्लॉट पर राष्ट्रीय चैनल पर दिखाने के लिए पहल  की । ऐसा करने से जासूस विजय को वाणिज्यिक दृष्टि से सफलता  मिली । इस प्रभाग ने जासूस विजय का क्षेत्रीय भाषाओं में रूपान्तरण प्रस्तुत किया ताकि यह देश के कोने-कोने तक पहुँच सके । फिलहाल इसके तीसरे चरण में इस कार्यक्रम को सात भाषाओं में डब किया जाता है ।

 

ग्लोबल मीडिया एड्स इनिशिएटिव

 

     विकास संप्रेषण प्रभाग को संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान द्वारा जनवरी, 2004 में आरंभ किए गए ग्लोबल मीडिया एड्स इनिशिएटिव (जीएमएआई) का भागीदार होने का विशिष्ट गौरव प्राप्त है । इस प्रभाग ने भारत के प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित एचआईवी/एड्स संबंधी राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया था । अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त सिनेस्टार रिचर्ड गेरे ने विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया था । प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपनी प्रस्तुति में कल्याणी और जासूस विजय की उपलब्धियों का उल्लेख किया । दूरदर्शन की पहल की प्रशंसा करते हुए केंद्रीय सूचना प्रसारण और संस्कृति मंत्री ने कहा कि अन्य मीडिया को एचआईवी/ एड्स संवाद में दूरदर्शन का अनुकरण करना चाहिए ।

 

     जीएमएआई के साथ सहयोग करते हुए विकास संप्रेषण प्रभाग ने हीरोज प्रोजेक्ट में भागीदारी  की । एचआईवी/एड्स से पीड़ित व्यक्ति रिकी पर एक लघु वृत्तचित्र का शिलांग, गुवाहाटी में निर्माण किया गया तथा असम से कल्याणी कार्यक्रम में इसका प्रसारण किया गया । इस वृत्तचित्र को अन्य भाषाओं में भी डब किया गया ।

 

     विकास संप्रेषण प्रभाग की यूनीसेफ, कैंसर फैमिली फाउंडेशन, एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ ब्रॉडकास्ट डेवलपमेंट, फोर्ड फाउंडेशन तथा यूरोपीय संघ के साथ भागीदारी रही है । ये भागीदारियां एचआईवी/एड्स के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए क्षमता निर्माण कर रही हैं और संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों का आदान-प्रदान कर रही हैं ।

 

कल्याणी 

 

विकास संप्रेषण प्रभाग ने मई, 2002 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से कल्याणी कार्यक्रम शुरू किया था । आरंभ में यह कार्यक्रम मलेरिया, एचआईवी/एड्स, कैंसर, क्षयरोग, आयोडीन की कमी, तंबाकू और पानी से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में विश्व तंबाकू निषेध दिवस (वर्ल्ड नो टोबेको डे) की पूर्व संध्या पर एक साप्ताहिक कार्यक्रम के रूप में एक वर्ष के लिए शुरू किया गया था । बाद के वर्षों में इसमें कुष्ठरोग, दृष्टिहीनता नियंत्रण और आहार सुरक्षा जैसे अन्य विषय जोड़ दिए गए ।

 

उत्कृष्ट परस्पर प्रभावी, अभिनव फार्मेटों, प्रस्तुतिकरण की बेजोड़ शैली, समेकित दृष्टिकोण और कल्याणी हैल्थ क्लब स्थापित करने की उत्कृष्ट पहल की वजह से इस कार्यक्रम की प्रभावकारी शक्ति बहुत ही जल्दी साबित हो गई । इससे अक्तूबर, 2002 में रिप्रोडक्टिव चाइल्ड हैल्थ के संबंध में एक और साप्ताहिक कार्यक्रम कल्याणी-।। के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ । कल्याणी-।। के फलस्वरूप कल्याणी कार्यक्रम प्राप्त करने वाले अन्य आठ राज्यों में पहाड़ी राज्य उत्तरांचल भी जुड़ गया । इस समय कल्याणी कार्यक्रम तीन भाषाओं और छह बोलियों में दूरदर्शन के 21 केन्द्रों से सप्ताह में चार बार प्रसारित किया जाता है और दो बार पुन: प्रसारित किया जाता है ।

 

सर्वाधिक पिछड़े और सघन आबादी वाले नौ राज्यों के लक्षित दर्शकों पर इसके प्रभाव से स्पष्ट होता है कि कल्याणी की प्रतिक्रिया अत्यधिक उत्साहवर्धक रही है । इस समय कल्याणी कार्यक्रम अपने पांचवें वर्ष में सफलतापूर्वक चल रहा है ।

 

एमटीवी के साथ सहयोग

 

विकास संप्रेषण प्रभाग ने वर्ल्ड एड्स डे समिट के लिए संगीत चैनल एमटीवी के साथ भी सहयोग किया है । यह एक विस्मयकारी सहयोग था क्योंकि अपनी विशेषताओं की दृष्टि से एकदम भिन्न दो चैनलों को आपस में मिलने के लिए आधार प्रदान किया है । इनमें से एक चैनल अपने गाम्भीर्य एवं सादगी के लिए प्रसिद्ध है तो दूसरा सीधी-सादी मौजमस्ती एवं मनोरंजन का चैनल है । सहयोग के दौरान सॉफ्टवेयर और लोकेशनों की रिपैकेजिंग और रूपान्तरण भी हुआ ।

 

     स्वास्थ्य के संबंध में ज्ञान को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए प्रभाग पल्स पोलियो और रक्त दान संबंधी अभियानों के लिए कार्यक्रमों का निर्माण कर रहा है । इसके अलावा विश्व एड्स दिवस पर 21 राज्यों में इंटरएक्टिव कार्यक्रम भी प्रसारित किए गए ।

 

कैसकेडिंग क्वालिटी गवर्नेंस

 

भारत में ई-गवर्नेंस की उत्कृष्ट पद्धतियों के बारे में वृतचित्रों की एक श्रृंखला का निर्माण करने और उसका प्रसारण करने के लिए वर्ष 2001 में एक अन्य उल्लेखनीय भागीदारी प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के साथ हुई थी । इसका शीर्षक कैसकेडिंग क्वालिटी गवर्नेंस था । इस अभियान का प्रसारण 2003 में किया गया तथा इसमें 12 वृत्तचित्र शामिल थे । इन वृत्तचित्रों का डीडी नेशनल पर और दूरदर्शन केन्द्रों के जरिए 12 राज्यों में इतनी ही भाषाओं में प्रसारण किया गया था । जिन केन्द्रों ने इन वृत्तचित्रों का प्रसारण किया वे हैं - बंगलौर, गुवाहाटी, मुंबई, कोलकाता, भुवनेश्वर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, जालंधर, अहमदाबाद, चेन्नै और हैदराबाद ।

 

बीमा संबंधी मामले

 

बीमा नियामक विकास प्राधिकरण की ओर से विकास सम्प्रेषण प्रभाग ने लोगों में बीमा के लाभों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए एक अभियान शुरू किया   था । इस अभियान का 10 राज्यों में 10 केन्द्रों द्वारा इतनी ही भाषाओं एवं बोलियों में प्रसारण किया गया था ।

 

पैसा हमारा फैसला हमारा

 

     कंपनी कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय ने निवेशकों को जागरूक बनाने और शिक्षित करने के लिए पैसा हमारा फैसला हमारा  नामक अभियान के लिए विकास संप्रेषण प्रभाग को कमीशन किया था ।

 

      पैसा हमारा फैसला हमारा एक इंटरएक्टिव फोन-इन कार्यक्रम था जिसमें फोन पर एक ओर निवेशक और दूसरी ओर विशेषज्ञ होते थे । यह कार्यक्रम निवेशकों की शिकायतों के समाधान के लिए तैयार किया गया   था ।

 

     यह कार्यक्रम सुरक्षित निवेश, ऐसी कंपनियां जिनमें निवेश नहीं करना चाहिए, निवेशकों के सामने आने वाली कठिनाइयां, शिकायतें दूर करने के लिए एजेंसियां तथा निवेशकों के अधिकार जैसे विषयों पर केंद्रित था । इसका प्रसारण अहमदाबाद, चेन्नै, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई स्थित छह केन्द्रों से किया गया था ।

 

जागो ग्राहक जागो

 

     ग्राहक के अधिकारों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए विकास संप्रेषण प्रभाग ने उपभोक्ता मामले विभाग के लिए एक मल्टी मीडिया कार्यक्रम आरंभ किया था । इस अभियान में जागो ग्राहक जागो नामक लोकप्रिय कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया था, जिससे जनता को बहुत अधिक लाभ हुआ  है । इस कार्यक्रम ने उपभोक्ताओं को धोखा देने के लिए शरारती व्यक्तियों, व्यापारियों, व्यावसायियों और सेवाएं प्रदान करने वालों के द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली युक्तियों के बारे में अवगत कराया है ।

 

     इस अभियान में उपभोक्ताओं को उत्पाद की सुरक्षा, उत्पाद की त्रुटियों, खाद्य पदार्थों में मिलावट और पर्यावरण संबंधी खतरों के बारे में भी जानकारी दी जाती है । इस अभियान का प्रसारण मई, 2005 से किया जा रहा है । इसके अतिरिक्त 8 राज्यों में 8 केन्द्रों से इतनी ही भाषाओं और बोलियों में ग्राहकों के अधिकारों के संबंध में लोकोपयोगी विज्ञापन प्रसारित किए जाते हैं ।

 

अन्य अभियान

 

     विकास संप्रेषण प्रभाग द्वारा जिस अन्य उपयोगी अभियान के बारे में कार्रवाई की जा रही है वह गृह मंत्रालय के अधीन जन्म एवं मृत्यु विभाग के लिए है । अभियान का उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु के रजिस्टरीकरण के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना है । इस अभियान के तहत चार राज्यों में चार केंद्रों से अनेक कार्यक्रमों का निर्माण और प्रसारण किया गया था । जन केरोसिन योजना नामक एक अन्य श्रृंखला के लिए सामग्री उपलब्ध कराने के लिए इक्कीस केंद्रों को लिंक किया गया था ।

 

"डीसीडी जो कार्य कर रहा है वह लोक सेवा प्रयास का भविष्य है ।"

के.एस. सर्मा,  पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रसार भारती

 

     इस प्रभाग को जिन और विभागों के अभियान के कार्य भी सौंपे गए हैं, वे इस प्रकार हैं - प्राथमिक एवं प्रौढ़ शिक्षा (मानव संसाधन विकास मंत्रालय), विज्ञान और प्रौद्योगिकी, महिला सशक्तिकरण, अवैध व्यापार, जनजातीय कार्य, पेटरालियम संरक्षण, जल संरक्षण, पर्यावरण एवं वन, उत्पादकता परिषद और आय कर ।

 

अभियान

 

     वर्ष 2001-2002 में पांच भागीदारों और नौ अभियानों से शुरूआत करके विकास संप्रेषण प्रभाग ने 2005-06 में 61 अभियानों तक का लंबा सफर तय किया है । केवल पांच वर्षों में यह सात गुणा वृद्धि प्रशंसनीय है । इस प्रभाग द्वारा चलाए गए सरकारी अभियानों ने राजस्व में 850% वृद्धि का योगदान दिया है ।

 

उपलब्धियां

     विकास संप्रेषण प्रभाग द्वारा निर्मित कार्यक्रमों ने दूरदर्शन को गेट्स मलेरिया पार्टनरशिप, कॉमनवैल्थ ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन (सीबीए) अवार्ड्स (2004), प्रतिष्ठित रोज डी' ऑर अवार्ड 2005(एचआईवी/एड्स) के लिए नामांकन, 31वां आरएपीए (रेडियो एंड टेलीविजन प्रैक्टिशनर्स एवं एडवरटाइजर्स एसोसिएशन) अवार्ड 2005 के जरिए राष्टरीय और अन्तर्राष्टरीय स्तर पर ख्याति दिलाई है । विकास संप्रेषण प्रभाग को ये सभी सम्मान कल्याणी के लिए प्राप्त हुए हैं । विकास संप्रेषण प्रभाग के कार्यक्रमों को मिले अन्य पुरस्कार इस प्रकार हैं: कॉमनवैल्थ ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन अवार्ड्स 2003 (एचआईवी/एड्स, हाथ से हाथ मिला), इंडियन टेली अवार्ड्स 2004 (बेस्ट पब्लिक सर्विस स्पॉट्स, एचआईवी/एड्स), इंडियन टेली अवार्ड्स, 2003 - सर्वश्रेष्ठ रोमांचक रचना के लिए (जासूस विजय एचआईवी/एड्स), वर्ष 2002 के सर्वश्रेष्ठ स्पॉट (तम्बाकू-विरोधी) के लिए दूरदर्शन वार्षिक पुरस्कार तथा वर्ष 2002 का सर्वश्रेष्ठ धारावाहिक (ग्राम्य विकास) ।

 

     विकास संप्रेषण प्रभाग की स्थापना के दो वर्षों के अन्दर ही तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री ने इसकी क्षमता को स्वीकार कर लिया था । अप्रैल, 2003 में लोक सभा में एक प्रश्न के उत्तर में तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा था कि विकास संप्रेषण प्रभाग द्वारा चलाए गए अभियानों के फलस्वरूप दूरदर्शन के सर्जनात्मक कौशल तथा आधारभूत संरचना का उपयोग करके इन-हाउस निर्माण में गुणात्मक एवं परिमाणात्मक सुधार हुआ है ।

 

     ऊषा भसीन, वरिष्ठ निदेशक, डीसीडी जिन्हें स्टाफ की कमी के बावजूद प्रभाग की सफलता का श्रेय जाता है, का कहना है कि - प्रबंधन विशेषकर प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री के.एस. सर्मा, दूरदर्शन के महानिदेशक श्री नवीन कुमार तथा उनके पूर्वाधिकारी श्री अनिल बैजल तथा श्री एस.वाई. कुरैशी का विकास संप्रेषण प्रभाग के कार्यों में काफी सहयोग मिला है । पहले मंत्रालय तथा विभाग अपने कार्यक्रम निर्माण के लिए निजी निर्माताओं पर आश्रित रहते थे तथा दूरदर्शन केवल उनके अभियानों का प्रसारण करता था । प्रभाग ने सही क्षेत्रों से योग्य व्यक्तियों को चुनकर इन-हाउस कार्यक्रम निर्माण को पुन:जीवित करने में सफलता प्राप्त की है ।

 

     इन-हाउस निर्माण क्षमताओं को सुदृढ बनाने की प्रक्रिया में, सृजनात्मक टीमों के कौशल में सुधार लाने तथा मुख्यालय स्तर पर और फील्ड में विभिन्न शाखाओं अर्थात् कार्यक्रम, इंजीनियरी, प्रशासन और अनुसंधान के बीच समन्वय को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी भी प्रभाग ने संभाली है । प्रभाग द्वारा इस प्रकार की पचास कार्यशालाओं की रूपरेखा तैयार की गई और उनका आयोजन किया गया जिनमें से कुछ बीबीसी के प्रशिक्षकों के साथ तथा भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान, पुणे में आयोजित की गईं ।

 

विकास संप्रेषण प्रभाग (डीसीडी) एक ओर सरकारी मंत्रालयों तथा विभागों तथा दूसरी ओर दूरदर्शन के मध्य एक सेतु का कार्य करता है । महानिदेशक दूरदर्शन का यह कहना है कि डीसीडी इन विभागों की संप्रेषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के विशिष्ट उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करता है । उन्होंने कहा कि डीसीडी के समक्ष अब यह चुनौती है कि वह अपने ग्राहक विभागों के लिए कार्यक्रमों को किस प्रकार और अधिक प्रभावी तथा आकर्षक बनाए । श्री कुमार ने कहा कि बीबीसी वर्ल्ड सर्विस टरस्ट के सहयोग से डीसीडी द्वारा सह-निर्मित "जासूस विजय" कार्यक्रम वर्ष 2003 में सर्वश्रेष्ठ रोमांचक कार्यक्रम माना गया था । डीसीडी तथा बीबीसी ब्लर्ड सेवा टरस्ट द्वारा निर्मित "हाथ से हाथ मिला" एक अन्य लोकप्रिय कार्यक्रम है । यहां यह भी स्मरण रहे कि कल्याणी प्रभाग द्वारा स्वतंत्र रूप से निर्मित कार्यक्रम है । श्री कुमार ने कहा कि अपने सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण के कारण कल्याणी आम जनता के आकर्षण का कारण रहा है । उन्होंने कहा कि दूरदर्शन द्वारा किए गए सर्वेक्षणों से यह पता चलता है कि कल्याणी कार्यक्रम उससे पहले तथा बाद में प्रसारित किए गए कार्यक्रमों से अधिक लोकप्रिय कार्यक्रम है ।

 

नवीन कुमार

पूर्व महानिदेशक,  दूरदर्शन

 

 

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